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Submitted by tester on Wed, 09/18/2019 - 18:03

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी नौ सिंतंबर को ग्रेटर नोएडामें मरूस्‍थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र समझौते (यूएनसीसीडी) में शामिल देशों के 14वें सम्‍मेलन (कॉप 14) के उच्‍च स्‍तरीय खंड को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत प्रभावी योगदान देने के लिए तत्‍पर है क्‍योंकि हम दो वर्ष के कार्यकाल के लिए सह-अध्‍यक्ष का पदभार संभाल रहे हैं। सदियों से हमने भूमि को महत्‍व दिया है। भारतीय संस्‍कृति में पृथ्‍वी को पवित्र माना गया है और मां का दर्जा दिया गया है।

 

Content

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/20/2019 - 16:42
Source:
दैनिक जागरण, 20 जून 2019
Drinking Water

हर घर पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती।
जिस देश में 82 फीसद ग्रामीण परिवारों की साफ पेयजल तक पहुंच न हो वहां पांच साल के अंदर 14 करोड़ घरों तक नल से जल पहुंचाना असंभव नहीं तो मुश्किल काम जरूर है। इसका कारण है कि देश के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल की स्थिति बेहद गंभीर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 22 फीसद ग्रामीण परिवारों को पानी लाने के लिए आधा किलोमीटर और इससे अधिक दूर पैदल चलना पड़ता है। इनमें से अधिकतर बोझ महिलाओं को ढोना पड़ता है। गांवों में 15 फीसद परिवार बिना ढके कुओं पर निर्भर हैं तो अन्य लोग दूसरे अपरिष्कृत पेयजल संसाधनों जैसे नदी, झरने, तालाबों आदि पर निर्भर रहते हैं।

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 15:10
Source:
drought in india

भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है।
भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। साफ पानी न मिलने के कारण हर साल दो लाख लोग जान गवां रहे हैं। देश के करीब 60 लाख लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि बढ़ती आबादी के कारण 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो जाएगी। 2030 के बाद ये संकट और भी ज्यादा गहरा सकता है। जिससे भारत की जीडीपी में 6 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इन सभी समस्याओं के बीच उत्तर प्रदेश में पांच करोड़ यूकेलिप्टिस के पौधे लगाने का निर्णय धरती की कोख को सोखने की तैयारी करने के समान प्रतीत हो रहा है। जिससे पानी की भीषण कमी झेल रहे उत्तर प्रदेश में निकट भविष्य में पानी की और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। जिसका नुकसान आसपास के इलाकों को भी उठाना पड़ेगा।

Submitted by UrbanWater on Tue, 06/18/2019 - 14:48
Source:
दैनिक जागरण, 13 जून 2019
Ganga

50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है।
50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। इसमें भी 25 करोड़ लोग तो पूर्ण रूप से गंगा के जल पर आश्रित हैं। स्पष्ट है कि गंगा आस्था ही नहीं, आजीविका का भी स्रोत है। नदियां केवल जल का नहीं बल्कि जीवन का भी स्रोत होती है। विश्व की अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं का जन्म नदियों के तट पर ही हुआ है। नदियां संस्कृति की संरक्षक हैं और संवाहक भी हैं। नदियों ने मनुष्यों को जन्म तो नहीं, परंतु जीवन दिया है। वास्तव में जिस प्रकार मनुष्य को जीने का अधिकार है, उसी प्रकार हमारी नदियों को भी स्वच्छंद होकर अविरल एवं निर्मल रूप से प्रवाहित होने का अधिकार है। नदियों को जीवनदायिनी कहा जाता है, फिर भी लाखों-करोड़ों लीटर प्रदूषित जल इनमें प्रवाहित किया जाता है। आज नदियों में शौच करना, फूल और पूजन सामग्री डालना, उर्वरक कीटनाशक डालना आम बात हो गई है।

प्रयास

Submitted by UrbanWater on Sat, 06/15/2019 - 14:13
Tarumitra forest

तरुमित्र जंगल।
पटना शहर के बीचों बीच दस एकड़ में फैला तरुमित्र जंगल बच्चों का खास दोस्त और शिक्षक बन चुका है। देश-विदेश के पांच हजार से अधिक स्कूल काॅलेज बतौर सदस्य इससे जुडे़ हुए हैं, जिनके हजारों छात्र भी तरुमित्र फोरम के सदस्य हैं। 1986 में पटना में तरुमित्र आश्रम की स्थापना हुई थी, जहां एक समृद्ध जंगल मौजूद है। 500 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधे इस जंगल की सुंदरता बढ़ाते हैं।

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source:
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
Short description of the image used by screen readers .

अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।
सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
Source:
shrinagar dam project

श्रीनगर बांध।।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

Submitted by UrbanWater on Sat, 05/04/2019 - 17:50
Source:
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गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम

गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 194 दिनों से अनशन कर रहे हरिद्वार के मातृ सदन के आत्माबोधानंद ने नेशनल क्लीन मिशन फाॅर गंगा के निदेशक के लिखित आश्वासन के बाद अपने अनशन को विराम दे दिया है। हालांकि मातृ सदन ने ये भी कहा है कि लिखित आश्वासन के अनुरूप अगर काम नहीं हुआ तो मातृ सदन गंगा की अविरलता के लिए फिर से अनशन पर बैठेगा।

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खासम-खास

काॅप 14: मोदी ने कहा सिंगल यूज प्‍लास्टिक पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देगा भारत

Submitted by tester on Wed, 09/18/2019 - 18:03

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी नौ सिंतंबर को ग्रेटर नोएडामें मरूस्‍थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र समझौते (यूएनसीसीडी) में शामिल देशों के 14वें सम्‍मेलन (कॉप 14) के उच्‍च स्‍तरीय खंड को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत प्रभावी योगदान देने के लिए तत्‍पर है क्‍योंकि हम दो वर्ष के कार्यकाल के लिए सह-अध्‍यक्ष का पदभार संभाल रहे हैं। सदियों से हमने भूमि को महत्‍व दिया है। भारतीय संस्‍कृति में पृथ्‍वी को पवित्र माना गया है और मां का दर्जा दिया गया है।

 

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सबको पेयजल पहुंचाने की चुनौती

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/20/2019 - 16:42
Source
दैनिक जागरण, 20 जून 2019

हर घर पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती।हर घर पानी पहुंचाना बड़ी चुनौती।
जिस देश में 82 फीसद ग्रामीण परिवारों की साफ पेयजल तक पहुंच न हो वहां पांच साल के अंदर 14 करोड़ घरों तक नल से जल पहुंचाना असंभव नहीं तो मुश्किल काम जरूर है। इसका कारण है कि देश के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल की स्थिति बेहद गंभीर है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के 22 फीसद ग्रामीण परिवारों को पानी लाने के लिए आधा किलोमीटर और इससे अधिक दूर पैदल चलना पड़ता है। इनमें से अधिकतर बोझ महिलाओं को ढोना पड़ता है। गांवों में 15 फीसद परिवार बिना ढके कुओं पर निर्भर हैं तो अन्य लोग दूसरे अपरिष्कृत पेयजल संसाधनों जैसे नदी, झरने, तालाबों आदि पर निर्भर रहते हैं।

धरती की कोख सोखने की तैयारी

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 15:10

भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है।भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है।
भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। साफ पानी न मिलने के कारण हर साल दो लाख लोग जान गवां रहे हैं। देश के करीब 60 लाख लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि बढ़ती आबादी के कारण 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो जाएगी। 2030 के बाद ये संकट और भी ज्यादा गहरा सकता है। जिससे भारत की जीडीपी में 6 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इन सभी समस्याओं के बीच उत्तर प्रदेश में पांच करोड़ यूकेलिप्टिस के पौधे लगाने का निर्णय धरती की कोख को सोखने की तैयारी करने के समान प्रतीत हो रहा है। जिससे पानी की भीषण कमी झेल रहे उत्तर प्रदेश में निकट भविष्य में पानी की और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। जिसका नुकसान आसपास के इलाकों को भी उठाना पड़ेगा।

अब गंगा को बचाने की जिम्मेदारी हमारी है

Submitted by UrbanWater on Tue, 06/18/2019 - 14:48
Source
दैनिक जागरण, 13 जून 2019

50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है।50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है।
50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। इसमें भी 25 करोड़ लोग तो पूर्ण रूप से गंगा के जल पर आश्रित हैं। स्पष्ट है कि गंगा आस्था ही नहीं, आजीविका का भी स्रोत है। नदियां केवल जल का नहीं बल्कि जीवन का भी स्रोत होती है। विश्व की अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं का जन्म नदियों के तट पर ही हुआ है। नदियां संस्कृति की संरक्षक हैं और संवाहक भी हैं। नदियों ने मनुष्यों को जन्म तो नहीं, परंतु जीवन दिया है। वास्तव में जिस प्रकार मनुष्य को जीने का अधिकार है, उसी प्रकार हमारी नदियों को भी स्वच्छंद होकर अविरल एवं निर्मल रूप से प्रवाहित होने का अधिकार है। नदियों को जीवनदायिनी कहा जाता है, फिर भी लाखों-करोड़ों लीटर प्रदूषित जल इनमें प्रवाहित किया जाता है। आज नदियों में शौच करना, फूल और पूजन सामग्री डालना, उर्वरक कीटनाशक डालना आम बात हो गई है।

प्रयास

पटना का ये जंगल हरित क्रांति का पर्याय बन रहा है

Submitted by UrbanWater on Sat, 06/15/2019 - 14:13
Source
वेब

तरुमित्र जंगल।तरुमित्र जंगल।
पटना शहर के बीचों बीच दस एकड़ में फैला तरुमित्र जंगल बच्चों का खास दोस्त और शिक्षक बन चुका है। देश-विदेश के पांच हजार से अधिक स्कूल काॅलेज बतौर सदस्य इससे जुडे़ हुए हैं, जिनके हजारों छात्र भी तरुमित्र फोरम के सदस्य हैं। 1986 में पटना में तरुमित्र आश्रम की स्थापना हुई थी, जहां एक समृद्ध जंगल मौजूद है। 500 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधे इस जंगल की सुंदरता बढ़ाते हैं।

नोटिस बोर्ड

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019

अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।
सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44

श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

गंगा की जय, सरकार झुकी, मातृसदन के आत्मबोधानंद का अनशन विराम

Submitted by UrbanWater on Sat, 05/04/2019 - 17:50

गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम  गंगा अविरलता के लिए चल रहे आत्मबोधानंद के अनशन का फिलहाल विराम

गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए 194 दिनों से अनशन कर रहे हरिद्वार के मातृ सदन के आत्माबोधानंद ने नेशनल क्लीन मिशन फाॅर गंगा के निदेशक के लिखित आश्वासन के बाद अपने अनशन को विराम दे दिया है। हालांकि मातृ सदन ने ये भी कहा है कि लिखित आश्वासन के अनुरूप अगर काम नहीं हुआ तो मातृ सदन गंगा की अविरलता के लिए फिर से अनशन पर बैठेगा।

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